Books and Memorabilia



एक निश्चित लक्ष्य की ओर... उम्मीद है मेरी अगली कृति ‪#‎अधूरा_आसमान‬ जल्द ही आप तक पहुंचेगी। आप सबों का सादर अभिवादन। ‪#‎अ‬}नजान सफर भी अब मुझको जाना पहचाना लगता है, इन गलियों में हम जैसों का ही आना जाना रहता है। ‪#‎धू‬}प - छांव से डर किसको... मैं रातों में तन्हा चलता हूँ, हर रात के बाद सुबह होगी, मैं उसके लिए मचलता हूँ। ‪#‎रा‬}स्ता को है खबर उस से गुजरने वालों की, कि कौन है आगे गया ? और कौन आया लौटकर ? • ‪#‎आ‬}समां से अब भला कोई शिकायत क्यों करूँ..? मैंने कल देखा उसे लाचार हो रोते हुए । ‪#‎स‬}र झुका कर जिसमें हिम्मत हो गिरेबां झांकने की, हक उसे ही है कि औरों पर कभी उंगली उठाए। ‪#‎मा‬}नकर मैं जी रहा था, चांद तो मेरा ही होगा, फिर अचानक जिंदगी में, बस अमावस्या ही आयी। ‪#‎न‬} जिसने जिंदगी में, हार कर भी जीत चाहा, वही किस्मत पे, छिपकर, आज तन्हा रो रहा है। . ©आनंद राज

Isn't it paradoxical that despite having so many friends,you at times feel really "Lonely"?
That despite so many options to choose from,you are totally clueless about about the "Right" career?
That despite all the Success you have achieved so far; you still have that burning desire to "Prove" Yourself ?
It certainly is but certaintly not unsolvable.Given some time, you might be able to sort it aout all by yourself.

आत्मकृति

'आत्म-कृति ' विभिन्न विषयों पर,विभिन्न मनोभावों के साथ लिखी गई कविताओं का एक ऐसा संग्रह है जिनमें लेखक अपने भावों को अभिव्यक्त करना चाहा है। पुस्तक के विषयवस्तु का चुनाव भी वर्तमान दौर के पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए किया गया है। मुख्य रूप से 'आत्म-कृति' वीर-रस, मुक्त छंद एवं प्रेम-रस का समिश्रण है। उम्मीद है कि लोगों द्वारा ये कृति पसंद की जाएगी। - आनंद राज

NIT की बातें हैं ये

एनआईटी की बातें हैं ये, आये मजा कहानी में, चलो याद कर लेते हैं, क्यूँ गयी पढ़ाई पानी में। यादों का झूला झूलेंगे, आसमान भी छू लेंगे चार बरस जीवन के वो ना भूले थे ना भूलेंगे। नए नए आये थे हम सब, आपस में अनजाने थे, सोचा था कुछ कर गुजरेंगे ऐसा मन में ठाने थे। डी हॉस्टल में रहते थे, तब रैगिंग भी तो सहते थे, फिर भी अपनी तकलीफें कहाँ किसी से कहते थे। एक सीनियर आये थे, वे खूब हमें भरमाये थे, शिमला जाने को कहकर अलमारी पर चढ़वाये था। शपथ नहीं हैं भूले अब भी, जो हमें दिलाई जाती थी, डाउन चलने की धमकी देकर, रूह कंपाई जाती थी। इंट्रो देते, विश करते, निकला रैगिंग मनमानी में चलो याद कर लेते हैं, क्यूँ गयी पढ़ाई पानी में। रैगिंग से आज़ाद हुए, गोपाल रामजी याद हुए, डब्बे की छत पर जा बैठे बिष्टुपुर का ख्वाब लिए। एक डब्बा हाईजैक हुआ, कांडरा मोड़ से बैक हुआ, कितनी घटनाएँ गिनवाऊँ, लफ़ड़ा एक से एक हुआ। जलाराम हो या आनंद, चन्दन ही चन्दन करते थे, जो भी पथ में आता था, उसका अभिनन्दन करते थे। करीम की किस्मत फूटी थी, पायल भी तब टूटी थी टूटा बसंत का शीशा जब भी, कारण कोई अनूठी थी। एमजीएम की घटना आज भी नजरों में है घूम रही, चुभे थे कांटे जहाँ जहाँ, पुरवइया आज भी चूम रही। साथ रहा जे डब्ल्यू सी तन्हाई भरी जवानी में चलो याद कर लेते हैं, क्यूँ गयी पढ़ाई पानी में। (जे डब्ल्यू सी - जशेदपुर वीमेंस कॉलेज) सन् अट्ठासी आया तो अब कैंपस भी गुलजार हुआ, फूटी मन में सबके ज्योति, उम्मीदों का संचार हुआ।। कितनों के तो कैरी आये, कितने इस खेल में फेल हुए, लुढ़के रहते थे दादू पर, कइयों के जीवन तेल हुए। टैरिट का निर्माण हुआ, जब बैच बना पूरा टकला, इस धर्मक्षेत्र इस कर्मक्षेत्र ने झेला है कितना हमला। (टैरिट- टकला एसोशिऐसन ऑफ़ आर आई टी) एक बार तो प्रिंसी ने मीटिंग सबकी बुलवाई थी, सभी स्टूडेंट्स बैठे थे और उनको खूब सुनाई थी। सुट्टा तो एक तुक्का था, पर घास ये कैसे जान गए, जुए में कितना हारे थे? इनकी जासूसी मान गए भेड़ भेड़िये का अंतर तब खूब समझ में आया था, जब अपने कुछ मित्रों को, जासूसी करते पाया था। कहते थे गुरुजन पढ़ लो, अपना भविष्य खुद ही गढ़ लो छोड़ो भारत माता को, खुद के लायक खुद को कर लो। लेकिन टूटी नहीं परम्परा, टीचर की ना सुनी जरा, टोपो से ही जिन्दा हैं, जीवन चुटके से हरा भरा। चुटके की फ़ोटो कॉपी तो होती थी कामानी में, चलो याद कर लेते हैं, क्यूँ गयी पढ़ाई पानी में। कवि ने गाया गीत नया, गुरु की भी बच गयी हया बड़े बड़ों के फंडे हारे,आशीष गुरु का जीत गया। खेल खेल में पढ़ना सीखा, पढ़ने में भी खेल किया, धन्य गुरुजी आपके कारण जीवन में ना फेल किया। गुरु दक्षिणा दे न सका, ना जीवन भर दे पाउँगा, पुनर्जन्म यदि होता है, मैं पुनः शिष्य बन आऊंगा। गुरु के चरण रहेंगे निसि दिन मेरी ही मेहमानी में, चलो याद कर लेते हैं, क्यूँ गयी पढ़ाई पानी में।

A Mumbai boy goes to Jamshedpur for pursuing engineering and experiences a never imagined eventful hostel life.


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Welcome! The Industry and Alumni Relations cell of NIT Jamshedpur is excited to present its first alumni newsletter. If you have any suggestions or requests for the future, we'd love to hear from you at the email address below. Happy Reading!

We live our day to day lives oblivious to the beauty that surrounds us and by the time we do realize what exactly it is that we've been blessed with, it's generally too late. However, when the good old days call yet again, nostalgia surrounds us as we walk the hallowed boulevards of our youth.

Hope that you enjoyed reading the last edition. Here we present you the next edition of AMRIT. Since we will be organising THE GRAND HOMECOMING this month, so this newsletter is being dedicated to the mega event.